आरबीआई कैसे बचा सकती है धोखाधड़ी से आपको

आरबीआई कैसे बचा सकती है धोखाधड़ी से आपको | जी हां बिल्कुल सही सुना आपने कभी-कभी इस देश में जितने भी जालसाज हो रहे हैं जितने भी धोखाधड़ी के मामले आ रहे हैं जितने भी ऑनलाइन फ्रॉड के मामले आ रहे हैं जितने भी लूट लपेट के मामले आ रहे हैं जितने भी ऑनलाइन ठगी के मामले आ रहे हैं इन सब मामलों को सुनने के बाद कभी कभी एक ख्याल आता है कि कहीं आरबीआई बैंक अकाउंट या जितने भी एटीएम है इन सबके साथ धोखा तो नहीं कर रही आरबीआई आरबीआई ने कभी कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जिसके लिए भारतीय ग्राहक आरबीआई को धन्यवाद कह सकें आरबीआई के लिए कभी भी भारतीय बैंकों के ग्राहकों को शायद वह सम्मान नहीं दिया जो आत्मसम्मान पाने के हकदार हैं सभी बैंकों के कस्टमर

आरबीआई ने कोई रूल क्यों नहीं बनाया

अगर कोई नियम बनाया तो उसका फॉलो क्यों नहीं किया गया

आए दिन हम देखते रहते हैं कि ऑनलाइन कि ठगी के मैटर हर रोज लाखों में होते हैं जिसमें आ तो ऑनलाइन फ्रॉड होता है या तो आप के थ्रू फ्रॉड होता है उनमें भी फोन पर गूगल पर पेटीएम आप से लेकर के भीम ऐप तक गॉड और ठगी का मामला आता है एटीएम से पैसे निष्कासन को लेकर के और भी तमाम मामले हैं जिसमें ऑनलाइन बैंकिंग हो जाता है क्रेडिट कार्ड की थकी हो जाती है कई बार इंश्योरेंस की ठगी हो जाती है तो इन सब के लिए आरबीआई नहीं उसका पालन नहीं किया गया बैंकों के द्वारा अगर देखा जाए तो बैंकों को हर दूसरे दिन केवाईसी का रंडी रोना होता है बैंक हर दूसरे दिन रोने लग जाती है कि केवाईसी करो केवाईसी करो केवाईसी करो हो सकता है जो केवाईसी के दौरान ठगी हो उसने बैंकों का भी हाथ होता है समझ में यह नहीं आया जब बैंक और ग्राहक के बीच की बात है तो तीसरे बंदे को पता कैसे चलता है ठगी का मामला उड़ता कैसे है कहां से शुरुआत होती है तो बहुत साफ और सीधी बात है कि आरबीआई ने ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया ऐसा कोई खास नियम नहीं बनाया जिससे ठगी को रोका जा सके या भारतीय ग्राहकों को बताया जा सके कि कैसे इंसान और ऐसे फ्रॉड वाली से बची आ सकती है अपने आप को बचाया जा सकता है

बैंक क्यों पालन नहीं करते आरबीआई के दिशा निर्देशों का

भारत में जितने भी बैंक हैं पता नहीं सारे बैंक आरबीआई के दिशा निर्देशों का पालन करती भी है कि नहीं मनमाने तरीके से केवाईसी करती हैं हर 2 दिन बाद केवाईसी चाहिए इनको काम करने के नाम पर काम नहीं करते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवाने का मतलब है आप अमेरिका का ग्रीन कार्ड पा गए मतलब इतना टॉप प्रोसेस है इन कमीनों का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवाने का टाइम है 3 महीने से 6 महीने 1 साल मतलब की बहुत साफ है कि आप प्राइवेट बैंक में जाएंगे तो आपका 10 मिनट में खाता खुल जाएगा आपके हाथ में एटीएम कार्ड से लेकर के पासबुक तक आपके बैंकिंग सारी डिटेल आपके हाथ में होगी बस 10 मिनट लगा आपका खाता बनकर तैयार खुलकर तैयार लेकिन ऐसा एसबीआई के साथ नहीं है पंजाब नेशनल बैंक के साथ नहीं है यूनियन बैंक ऑफ इंडिया इलाहाबाद इलाहाबाद बैंक के साथ ऐसा कुछ भी नहीं है क्यों क्योंकि यह बैंक सरकारी है और यह इतनी स्लो काम करते हैं इतना काम चोरी करते हैं कि आप जाकर देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे चुल्लू भर पानी में डूब मरेंगे वहां पर तो समझ में यह नहीं आया कि मतलब ऐसा कदम क्यों नहीं उठाती इन लोगों के लिए

जब कोई बैंक शुरुआत में ही केवाईसी कर ले तो बाद में इतनी प्रॉब्लम क्यों आती है?

आपको जानकर हैरानी होगी हजार में से 999 मामले केवाईसी के नाम पर होते हैं जिनमें ठगी होती है यह ठगी डेबिट कार्ड के केवाईसी से लेकर के ऑनलाइन बैंक की केवाईसी से लेकर के बैंक अकाउंट के डिटेल तक की केवाईसी करने की होती है सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बैंक सीधा-सीधा दिशानिर्देश अपने ग्राहकों को क्यों नहीं देते की केवाईसी आपका करवाना है साल के इन इन महीनों में होगा जब भी आपके पास टाइम मिले अपना आना आधार कार्ड लेकर पैन कार्ड लेकर आ जो भी एग्जीक्यूटिव भेजना है किसी कस्टमर के घर पर तो उनको भेजो कस्टमर को बैंक बुलाना है तो कस्टमर को भेजो जब महीने फिक्स हो जाएंगे कि इन इन महीनों में आप केवाईसी करवा सकते हो किसी भी टाइम तो ऐसे में जब किसी दिन बैंक खुला रहेगा ग्राहक को लगेगा हमारे पास टाइम है आज बैंक भी खुला हुआ है तो ग्राहक अपने हिसाब से जाएंगे और बैंक की सुविधा के लिए भी खुद की सुविधा के लिए भी जाएंगे और बैंक में केवाईसी कराकर आसानी से चले आएंगे लेकिन यहां ऐसा नहीं है यहां सबसे ज्यादा गदर इस देश में किसी ने मचाया है तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पंजाब नेशनल बैंक ने इन दोनों बैंकों ने पूरा कर दिया है किसी के नाम पर जितनी ज्यादा ग्राहक एसबीआई एसबीआई के लूटते हैं पंजाब नेशनल बैंक के लूटते हैं उतना ग्राहक किसी और बैंक के शायद ही लूटते होंगे सवाल यह है क्यों क्योंकि एसबीआई में केवाईसी करवाने का मतलब है आप भगवान से कुछ मांग रहे हैं बिना किसी मेहनत किए मतलब भगवान से आप बिना मेहनत के कुछ मांगे तो मिल जाएगा लेकिन मेहनत करने के बावजूद भी आप एसबीआई को कहेंगे भी कर लो तो सुबह से लेकर शाम तक घंटा भी करवाई नहीं करेंगे लाइन में खड़े रखेंगे अलग बनाएंगे शाम को आपको लौट के आना पड़ेगा एक ऑप्शन आता है सो जाओ अब ऐसे में जो होता है वह फायदा उठा लेते हैं और यह सब कैसे हुआ इन लोगों की लापरवाही से

लापरवाही से और ठगी से जालसाजी से धोखाधड़ी बचा जा सकता है

सवाल यह है कि क्या इन लापरवाही से और ठगी से जालसाजी से धोखाधड़ी ऑनलाइन ठगी के गोरखधंधे से बचा जा सकता है तो कैसे

इन सारे स्टेप्स का फॉलो फॉलो अप करके इन सारे रूल को बना करके या ऐसे किसी नियम में सुधार करके आरबीआई अगर चाहे तो केवाईसी से रिलेटेड जितने भी प्रॉब्लम है उनको महीने के अंदर सुधार सकती है और केवाईसी फ्रॉड जमीनी स्तर पर रुक जाएगा

  1. केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर आरबीआई को नियम बनाना चाहिए डायरेक्ट बैंक जाकर के कस्टमर अपना केवाईसी कराएगा
  2. केवाईसी कराने के लिए कोई भी बैंक कभी कॉल नहीं करेगा
  3. खाता खुल आते समय ग्राहकों को खुले शब्दों में बयां कर देनी होगी कि जब भी बैंक को केवाईसी करवानी होगी आपका तो आप डायरेक्टली बैंक आकर केवाईसी कर आएंगे आपके पास कोई कॉल केवाईसी से लेटर नहीं जाएगी
  4. यदि किसी कस्टमर का एटीएम कार्ड डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड एक्सपायर हो जाता है तो ऐसे में जरूरी हेल्पलाइन बैंकों को अपने पास बुक के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में छापना होगा और कस्टमर को बताना होगा की भोंदू की तरह गूगल पर सर्च ना कीजिए इन नंबरों को सेव कर लीजिए और इन पर कॉल करना जब भी आप कोई भी प्रॉब्लम फेस करते हैं तो
  5. केवाईसी के लिए एसबीआई जिस तरीके से हड़बड़ी मचाती है जिस तरीके से धक्का-मुक्की करवाती है उस तरीके की जरूरत है नहीं इस देश में केवाईसी बहुत आसानी से भी हो सकता है बस एसबीआई को बोलना होगा ग्राहकों को दो-तीन महीने साल भर में फिक्स कर देना होगा कि इन समय में जब भी केवाईसी की जरूरत पड़ेगी तो कोई भी बैंक इन 3 महीनों में किसी भी टाइम पर आकर अपना केवाईसी करवा कर घर चला जाएगा आराम से
  6. यदि बैंक का कोई नंबर अपडेट होता है जो कि कस्टमर केयर नंबर है तो उसको वेबसाइट पर और पासबुक पर और बैंकों में भी बड़े-बड़े शब्दों में मेंशन करने की जरूरत है आप डेट करने की जरूरत है क्योंकि ज्यादातर कार्ड कस्टमर केयर नंबर सही होता है या कस्टमर केयर के नंबर पर नंबर के नाम पर ही होता है
  7. सभी बैंक ग्राहकों से इतना पैसा कमाते हैं ऐसा तो नहीं है कि सभी बैंक खाते में है तो ऐसे में सभी बैंकों का फर्ज बनता है कि 10552 का साइबर टीम हर एक बैंक के हेड क्वार्टर में होना चाहिए जो देखरेख करें कि गूगल ऐड से लेकर के फेसबुक ऐड या फेसबुक ग्रुप या कोई भी ऐसा ग्रुप या कोई भी ऐसा ऐड ना चले जिससे कि डायरेक्टली केवाईसी का फ्रॉड या ठगी हो रही हो या होने की संभावना हो यानी यदि कोई गूगल ऐड किसी ठग ने दे रखा है जिस में फर्जी बैंक का कस्टमर केयर नंबर है तो ऐसे ऐड को बो टीम वहीं पर रिमूव करवा दे गूगल से रिपोर्ट करके कि यह फर्जी है
  8. समय-समय पर ग्राहकों को जानकारी देते रहना कि साइबर फ्रॉड क्या होता है बैंकों में कितने प्रकार के फ्रॉड हैं या हो सकते हैं आप फ्रॉड से कैसे बच सकते हैं आप उन फोर्ड को कैसे अवार्ड कर सकते हैं अगर कोई प्रॉब्लम आए आपको तो आप क्या करें क्या ना करें
  9. देश के सभी मौजूदा बैंकों में एक एग्जीक्यूटिव होना चाहिए जो इस तथ्य ग्राहकों की समस्याओं को सुलझाएं ज्यादातर बैंकों में ऐसे लल्लू पंजू कितना किसी को मुंह उठा कर बैठा देते हैं और बस प्रॉब्लम की समस्या यहीं से शुरू हो जाती है
  10. सभी बैंकों को अपने बैंक में एक डायरेक्ट हेल्पलाइन रखनी चाहिए जिससे किसी भी समय प्रॉब्लम होने पर ग्राहक कस्टमर केयर जैसे बेवकूफ क्यों से बच सके और डायरेक्ट अपने बैंक में कॉल करके अपनी परेशानी सुलझा सके अक्सर देखा गया है कि बैंकों के एग्जीक्यूटिव ज्यादा जल्दी से प्रॉब्लम सॉल्व कर देते हैं और कस्टमर केयर पर सारी डिटेल फील करवाने के बाद तब आपका कॉल कनेक्ट भी होता है कई बार नहीं होता है ऐसे में ग्राहक फ्रस्ट्रेट होकर दूसरे ऑप्शन खोजता है और तब ग्राहक जाता है गूगल पर और गूगल एक रोबोटिक सिस्टम है की बैंक के हेल्पलाइन कौन सी है कौन सी नहीं है
  11. आरबीआई को सख्त दिशा निर्देश देना चाहिए गूगल जैसे सर्च इंजन को फेसबुक को भी ट्विटर को या देश में जितने भी सोशल मीडिया एप्स नया सर्च इंजन है उनको कि बैंक से रिलेटेड कोई भी ऐड आप लोग नहीं रन करोगे बैंक से रिलेटेड कोई भी ऐड या ऐसा कुछ कस्टमर केयर नंबर यदि आप लोग करते हो तो आपके ऊपर जुर्माना लगेगा और आप इसके लिए जिम्मेदार हैं
  12. आरबीआई का सख्त दिशानिर्देश भारत देश के हर एक राज्य के आईपीएस आईएएस अफसरों को भी मिलना चाहिए देना चाहिए कि यदि किसी कस्टमर के साथ फ्रॉड हुआ है तो अच्छे से उसकी समस्या उसकी एफ आई आर दर्ज करी जाए उसकी हेल्प करी जाए ताकि आने वाली दूसरी फ्रॉड को होने से पहले ही रोक दिया जाए हजार में से 999 मामलों में पुलिस एफ आई आर दर्ज करती ही नहीं और समस्या का कारण बस यहीं से शुरू होता है जब किसी कस्टमर के साथ फ्रॉड हो जाता है तो वह बैंकों के चक्कर लगाकर थक जाता है पुलिस वालों के चक्कर लगाकर थक जाता है और अंत में वह थक हार कर बैठ जाता है यही हाल दूसरे कस्टमर का होता है यही हाल तीसरे कस्टमर का होता है और यही हर दूसरे कस्टमर के साथ होता है
  13. भारत सरकार को पुलिस वालों की सैलरी बढ़ा देनी चाहिए जिससे पुलिस की खोज खाने की समस्या ना आए साथ ही साथ पुलिस वालों की जितनी भी यूटिलिटी बिल है उनको भी हाथों हाथ चुकता कर दिया जाए जैसे कि किसी कैदी को आने लाने जाने का जितना खर्चा है वह सरकार सरकार का है कि सरकार देगी लेकिन सरकार ऐसे में देती नहीं हो खर्चा किसी भी कस्टमर के प्रॉब्लम को सुलझाने के लिए आने जाने में लगा तेल का खर्चा गाड़ी का खर्चा भी पुलिस वालों को सरकार की तरफ से मिलना चाहिए और अंत में पुलिस वालों की सैलरी इतनी होनी चाहिए कि इस देश में कोई भी पुलिस वाला घूस ना खाएं जैसे ही बात पुलिस वालों की आती है सबके मन में बस एक चीज बैठ जाती है वह चीज है उसको और प्रॉब्लम बस यही है मेरे साथ भी कई ऐसे वाकई हुए हैं जिसमें पुलिस वालों की घूसखोरी का एक बड़ा उदाहरण मैंने देखा साक्षात रूप में तो इस वजह से पुलिस वालों के पास लोग जाने से डरते हैं और जो पुलिस के पास जाते हैं पुलिस उनसे घुस मांगती है अब जरूरी नहीं है ऐसा हर एक मामले में हो नहीं कई मामले में पुलिस अच्छा भी करती है अच्छा काम करके भी देती है प्रॉब्लम को टाइटल भी करके देती है प्रॉब्लम का सलूशन भी ढूंढ कर निकाल देती है लेकिन फिर भी भारत सरकार का यह कर्तव्य है कि पुलिस वालों को किसी भी प्रकार का कष्ट ना होने दें और पुलिस वालों के नाम से घूसखोरी का जो धब्बा है इसको हटाए यह सिर्फ भारतीय गवर्नमेंट कर सकती है और जनता नहीं कर सकती क्योंकि पुलिस वालों को खर्चे अगर सरकार से नहीं मिलेंगे तो अपनी जेब से लगाएंगे नहीं तो ऐसे में जनता के जेपी फर्क पड़ेगा जनता ही ऐसा पैसा निकाल कर देगी तो सरकार का भी कर्तव्य है कि पुलिस वालों को इस लायक बनाया कि उनकी सैलरी इतनी कर दें कि उनको घूस खाने की जरूरत ना पड़े
  14. अगर बात हो रही है पुलिस वालों की तो पुलिस वालों की नौकरी सरकारी होती है और वेद मोदी जी सारी सरकारी चीजें बेच रहे हैं बेचते जा रहे हैं तो ऐसे आने वाले समय में सहायक पुलिस वालों को ही बेच दें मोदी जी उनको प्राइवेट कर दें तो देखते हैं क्या होता है? क्या नहीं?

तो यह थे कुछ ऐसे सुझाव जिससे आरबीआई या भारत सरकार किसी भी कस्टमर के साथ फ्रॉड होने से पहले ही उसको रोक दें या रोकने का प्रयास करें ऐसे में बैंकों का भी उत्तर दायित्व बनता है कि वह लोग ऐसे ही फ्रॉड होने के पहले से ही उस कोड को रोक दें या होने ही ना दें और ऐसे में सबसे बड़ी जो बात आती है वह भी जागरूकता की बैंक को जागरूक होने की जरूरत है और अपने कस्टमर को भी जागरूक करने की जरूरत है साथ ही साथ आरबीआई को भी जरूरत है कि वह जिस तरीके से आरबीआई का साल भर में का जो मैसेज आता है वह भी इस फैन बॉक्स में इससे तो शायद ही भला हो पाएगा कभी किसी इंडियन का भी किसी भारतीय बैंक के कस्टमर का भी।

तो आपके पास क्या क्या सुझाव है इस चीज को ले करके उसे भी आप कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं

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