EPFO ki ghuskhori aur gaddari एंपलॉयर के साथ मिलकर एंपलाई को ठगना तंग करना दुखी करना

EPFO ki ghuskhori aur gaddari | ईपीएफओ की घूसखोरी और गद्दारी का बेहतरीन नमूना इस पोस्ट में आप लोग जान पाएंगे कि कैसे क्या क्या हुआ हमारे साथ मेरा नाम दीपक है और मैं दिल्ली में मोती नगर डीएलएफ टावर में एक कंपनी में काम करता था कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर हमारा ऑफिस 2nd फ्लोर पर स्थित है स्थित था और 2014 के बाद नई 2015 में मार्च महीने में मेरी नौकरी लगी थी सेकंड फ्लोर के ऑफिस में कांट्रैक्ट बेसिस पर उसमें मैंने तन मन धन से काम किया था सब लोग मानते जानते भी थे। महिपालपुर एयरपोर्ट के करीब है तो उसी महिपालपुर में कंपनी स्थित है ए टू जेड हाउसकीपिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तो पहली कंपनी थी वही थी उस कंपनी में सब कुछ अच्छा था हम जैसे कॉन्टैक्ट एंप्लॉय की देखभाल से लेकर के समय समय पर पूछताछ करना कि कोई दिक्कत तो नहीं कोई प्रॉब्लम तो नहीं है और डिजिटल सिग्नेचर होता है एंप्लॉय के द्वारा तो 2018-19 में ए टू जेड ग्रुप ऑफ़ कंपनीज ने डिजिटल सिग्नेचर करके हमारे ईपीएफ का बैंक अकाउंट और जो दूसरे आईडी प्रूफ है उनको डिजिटल वेरीफाई कर दिया था और एपीएफओ के साइड में दिखा रहा था वेबसाइट में यहां सब कुछ ऐसा कुछ ऐड हुआ है।

सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन 2020 के आते-आते हमारी कंपनी को बिजनेस को एक्सपेंड कर करना पड़ गया कंपनी और उनको यहां से सब कुछ शिफ्ट करना पड़ गया गुड़गांव के डीएलएफ टावर में डेरा टावर में या गुड़गांव में कहीं क्योंकि मैं तो कभी गया नहीं गुडगांव आप एक जगह पर मुझे भी हालांकि ऑफर मिला था लेकिन क्योंकि इस कंपनी ने मुझे अच्छा चल दिया था एमसीए करने का तो इसलिए मैं कभी गया नहीं मैं सोचा कि यहीं पर है कि अपनी जॉब खत्म कर लूंगा जो भी है जितना भी टाइम है यहां पर कर लूंगा उसके बाद जो है जॉब छोड़ दूंगा और तो कंपनी जॉब सिक्योरिटी गुडगांव तो उसी दौरान उन्हें एडमिनिस्ट्रेटर को हायर किया था वह लड़की थी वह घटिया किस्म की लड़की थी और बेहद जाहिल और वाहियात लड़की थी वह नीतू सिंह नाम था तो उस कमीनी लड़की ने क्या किया उस कमीनी लड़की ने उस कॉन्ट्रैक्ट को ए टू जेड के कॉन्ट्रैक्ट को हटाकर दूसरा कॉन्ट्रैक्ट कांट्रेक्टर रख लिया और जो दूसरा कांटेक्ट था वह उसका नाम है पास्कल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड बहुत ही घटिया कंपनी और बहुत ही हरामखोर एमडी है उसका विजय कुमार नाम है उस कमीने का

इसके बाद 2 दिन शुरू हुए सारे एम्पलाई के जब कोविड-19 आया तो उस टाइम पर ना तो एंपलॉयर को ढंग से सैलरी देता था जिसको देता था उसकी कार्ड बांट लेता था सैलरी पूरे पैसे नहीं देता था और ऐसे ही सीन चलता गया और 2020 के 21 का जुलाई महीना आ गया है ऐसे में तो 2020 के तीसरे महीने में पास्कल सर्विसेस को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था 2020 के जुलाई का महीना जब आ गया तो तब मेरी यहां मोती नगर से जॉब छूट गई क्योंकि ऑप्शन ही नहीं बचा था ना तो छोड़ना ही था कंपनी पूरी तरह से यहां शिफ्ट यहां से वहां गुडगांव और जो समान था वह भी होगी लगभग शिफ्ट हो चुका था तो ऐसे में कोई और ऑप्शन नहीं था आप तो जुलाई 2020 में जॉब नहीं जॉब नहीं रहा और जॉब छूट गई और इसके बाद हुए शुरू देव दुर्दिन तो और जुलाई महीने से लेकर के तब तक मैंने सोचा कि मैं अपना ऑनलाइन पीएफ निकाल लूं लेकिन जो पास्कल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड थे इतने कमीनी थे

कि इन कमीनों ने ईपीएफओ की जो डिजिटल सिगनेचर होती है यह जो है वेरीफाई नहीं किया और इसके कारण ऑनलाइन पीएफ निकालने में नाको चने चबाने पड़ गए पड़ गए नहीं अभी पढ़ रहा है ठीक है आज 2021 का सितंबर महीना चल रहा है और अभी भी पीएफ नहीं आया मुझे नहीं मिला क्या होता है कई बार पैसों की बेहद जरूरत पड़ जाती है जब आर्थिक तंगी सताती है सोचा था जितने भी पैसे मिलेंगे उसमें से ज्यादातर पापा को दे दूंगा और एक भाग अपने पास रख लूंगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ आप यहां प्रॉब्लम आती है जब मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया था यार लिखवाने के लिए तो दिल्ली पुलिस ने f.i.r. लिखा नहीं मतलब सीधा सीधा जान लो कि उन्होंने चुटिया काट लिया चुटिया बना दिया और उन्होंने f.i.r. नहीं लिखा इसके बाद हर दूसरे महीने में 2021 का जनवरी महीना था जब मैंने 2020 का दिसंबर महीना था जब मैंने अपना ईपीएफओ के साइट पर पहला ग्रीवेंस रिपोर्ट दर्ज किया लेकिन इसके बावजूद भी सुनवाई कुछ नहीं हुई उत्तर यह मिला कि आपका सबकुछ कंप्लीट है आप कृपया अपना पीएफ निकाल लो और

मैं अभी पीएफओ के इन गधे ऑफिसर को क्या बोलता मैं इन लोगों के के गधे ऑफिसर्स को जो कि घूसखोर है बेसिकली । इनको भी चाहिए होता है बिना घूस क्यों कोई काम करते नहीं कभी-कभी तो लगता है कि मोदी जी जो सरकारी नौकरियां बेच दे रहे हैं जो सारे सरकारी जमीनें बेच दे रहे हैं जो सारे सरकारी सब कुछ बेच दे रहे हैं वह कहीं बहुत बढ़िया कर रहे हैं । फिर भी तरस आता है कि सरकारी चीज जब सब कुछ बिक जाएगा मोदी जी जब भेज देंगे तो इन हरामियों का क्या होगा जो भी जीवित रहते हैं ऐसे कुत्तों का क्या क्या होगा

तो काफी फ्रस्ट्रेशन भरी जर्नी रही इसके बाद द्वारका सेक्टर 21 का जो ईपीएफओ साइट है जो उनका ऑफिशियल जो ऑफिस है यहां पर महीने में लगभग 25-30 बार जाना पड़ा और सुनवाई कोई नहीं हो रही है ना वो कोई तरीका बता रहे ना सुन रहे हैं जितनी बार बार भी मैंने इपीएफ निकालने के लिए क्लेम डाला ऑफलाइन ऑनलाइन तो ऑफलाइन में रिजेक्ट हो जाता था या तो फाड़ कर फेंक देते थे या जमा नहीं करते थे तो जो द्वारका ऑफिस में सिक्योरिटी गार्ड खड़े होते हैं जॉब पर उनकी 100% गलती नहीं मानता है लेकिन वह भी गद्दार होते हैं इन सालों को जानकारी तो होती नहीं कुछ उठा कर कुछ भी किसी को बोलते रहते हैं और

और करुणा के नाम पर बेचारे आम जनता पर जो ईपीएफ के ऑफिस लाइन लगाकर खड़े होते हैं , इन कमीनों में सिर्फ एक या दो अफसर गेट पर खड़े होते तो और साले पूरे दिन भर मिलकर के पूरे पब्लिक को चुटिया बनाते थे और छह सात सौ लोगों को लाइन से खड़ा करके एक बंदा चुटिया बना कर कहता था भैया तुम खड़े हो तुम्हारा प्रॉब्लम सॉल्व होगा और मुंह से बताता ना वह साला कुछ कंप्यूटर से चेक करता था ना वह मोबाइल से चेक करता था बस ऐसे ही चुटिया बना दिया करता था हम यह करेंगे हम वह करेंगे करते कुछ नहीं थे वह साले किसी का तो इसके बाद जब मैं दुखी होकर के जुलाई महीने में मैंने दिल्ली पुलिस में फाइनली 22 एफ आई आर लिखवाए जिसमें से एक हजार वैलिड हो गया मतलब एक एफ आई आर लिख लिया

दिल्ली पुलिस ने भी काफी विनती करें और पुलिस वालों का बेल्ट नंबर पूछा पुलिस वाले किस चैनल नंबर से बात कर रहे हैं तो यह सब पूछने के बाद तब जाकर पुलिस वालों ने इतना मेरे गेट गिराने पर एफ आई आर लॉन्च करा तो इसके बाद दिल्ली पुलिस की नाकामी घूसखोरी हरामखोरी सब कुछ शुरू हुई ऐसा नहीं है सम्मान नहीं करता सम्मान करता हूं लेकिन एक समय आ जाता है जब लगता है कि दिल्ली पुलिस क्या कोई भी पुलिस है वह अपना सम्मान खो चुकी है एक-दो हफ्ते तक तो हमारा मैटर से लटकाया गया दिल्ली पुलिस में भैया उसके बाद एंपायर के जितने भी डिटेल मैंने निकाल रखे थे चाहे इंटरनेट से जो मेरे पास थे वह सब मैंने दे दिए थे दिल्ली पुलिस ने इसके बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं की तो दिल्ली पुलिस ने उठाकर मेरे साथ चलकर जहां ऑफिस ऐड्रेस था वहां विजिट कर लिया सुल्तानपुर में सुल्तानपुर यही दिल्ली वाला

तो कहने का यह मतलब है कि पुलिस ने भी अपना काम इधर से पकड़ो लेकिन कान उधर से पकड़ो मतलब उन्होंने भी ठेठ हिंदी में ठुल्लू काटा मेरा और कोई नया वाला नहीं दिया भैया कोई झूठ नहीं बोलना है तो और इस फिर मैटर को दबाने के लिए केस को क्लोज करने के लिए मेरे से एक पेपर पर लिखवाया गया क्या भाई यहां पर यह एड्रेस नहीं है यह वह और जो वहां पर रहने वाले जिस के एड्रेस पर हमारी कंपनी का नाम दर्ज था उनसे उनको उनका भी सिग्नेचर वगैरह लिया गया कि ऐसी कोई कंपनी आती नहीं ऐसा कोई काम या चलता नहीं था उसके बाद मेरा मैटर दबा दिया गया है

कि इतनी घूसखोरी और गद्दारी क्यों की एक डेढ़ लाख रुपए दिल्ली पुलिस को गोश्त क्यों नहीं देता रे नैना जाने को नहीं देता मतलब एक डेढ़ लाख रुपए रंडी नचाने को ही देता हूं दिल्ली पुलिस को ऐसा उनका कहना था जो विजय और सीमा थे विजय कुमार और सीमा कुमारी या जो भी नाम था उस हरामीन डायरेक्टर का दो इसके बाद भाई ना तो यहां से कुछ नया मिला ना किसी न्याय की उम्मीद थी ना तो कुछ ऐसा हो सका तो दिल्ली पुलिस से जो आस थी उम्मीद थी वह भी छूट गई तो जो कारपोरेट मिनिस्ट्री होती है या अभी तो उसका नाम भूल गया हूं या कुछ मिनिस्ट्री होती है तो यह लोग क्या होते हैं कि कंपनियों को वह देते हैं कीप चलो प्राइवेट कंपनी का तमगा दे देते हैं तो भारत में ऐसी करोड़ों कंपनियां दर्ज हैं सिर्फ फर्जी और फ्रॉड सिर्फ कागजों पर चल रही है उनका ना कोई अस्तित्व जमीनी ना कुछ और पुलिस वालों को भी सब कुछ पता है लेकिन पुलिस वाले उस पर कुछ करते औरतें बिल्कुल नहीं है तो इसके बाद पीएमओ ऑफिस जाना शुरु किया गृह मंत्रालय ऑफिस जाना शुरू किया भीकाजी कामा प्लेस में जो उस ईपीएफओ के गद्दार जो हेड है उसका नाम क्या है वह बताता हूं अभी

असली में मैं गद्दार तो ईपीएफ क्योंकि उस हेड का मानता हूं जिसका नाम अभी आ नहीं रहा है मेरे में तो वह एक आईएएस अफसर है सवाल यह कि जब दूसरे आईएएस अफसर बने और उन्होंने ऐसे ही काट काट के काट काट के चल भाई टाइम पास कर रहे मैं अपना टाइम पास कर रही यही सोच कर अपना भाई पूरी जनता का चुटिया काट रहे ढंग से और इसमें जनता का कुछ होना जाना नहीं है जनता बस किसी चुटिया पर की मार झेल रही हर रोज तो ऐसा मेरे साथ भी हुआ

याद आ गया उस आईएस का नाम जो ईपीएफओ का हेड है उसका नाम सुनील बार्थवाल है तो मैं इन सब चीजों का जो जिम्मेदार मानता हूं वह सुनील बर्थ वालों को मानता हूं क्योंकि सुनील जो बर्थ वालों है इस बंदे को इस आईएस को पता नहीं है कि काम कैसे होता है कैसे नहीं होता है जब्बार डिजिटल सिग्नेचर की आती है या वेरीफिकेशन की आती है तो साला तुमने सिर्फ एंप्लॉई को क्यों रखा है यह बताएं और के अलावा और कोई बंदा नहीं हो सकता जो आधार कार्ड या बैंक डिटेल वेरीफाई कर सके डिजिटली और जब मेरा पहले से वेरीफाई किया हुआ था तो तुम्हें कराने की जरूरत ही नहीं दोबारा कराएं जोती नहीं स्कोर बताओ इंडिया में इंडिया में उसके बाद फिर ट्विटर पर ट्वीट करना शुरू किया हर रोड ट्वीट किया हर रोज ट्वीट किया हर रोज वेट किया

लेकिन वही कहावत है कि स्ट्रीट थे या इन सब चीजों से कुछ होना जाना तो बिल्कुल है नहीं क्योंकि गद्दारी जब जिसके खून में भरी पड़ी हो वह नहीं निकलेगी तो ईपीएफ के लोग भी कहीं ना कहीं गद्दार हैं सवाल यह है कि जब मोदीया सब कुछ ऑनलाइन करा रहा है बैंक डिटेल से लेकर के सब कुछ ऑनलाइन तो यह चुटिया सा क्यों भाई आधार कार्ड से ऑनलाइन अपना ओटीपी आए और साला जैसे तुम सिमरिक लगाते हो ऐसी चीजें करवाते हो वहां डिजिटल खुद साइन होकर आ जाए लेकिन नहीं इनका चुटिया वाला क्या इनको बताएं हम इन आंखों को झेलने की सलाह मत कर आए तो अभी तक सितंबर महीना चल रहा है 2021 का तो ऐसा कुछ भी होगा जो कुछ भी होगा क्या है क्या नहीं क्या अपडेट है इसमें तो ऐसा बोल तो रहे हैं गद्दारी बीएफ वाले कि मिल जाएगा पैसा मिल जाएगा पैसा

तो वही है किसी दिन अपनी और भड़ास निकाल लूंगा मैं कि दिल्ली पुलिस आकर घुस क्यों खाती है या उनके गोश्त खाने का रवैया गुस्सा है वह ऐसा क्यों है तो इसके बारे में बात होगी और मैं नहीं मानता कि घूसखोर अगर पुलिस वाले हैं तो इनकी गलती है क्योंकि इनकी जो खर्चे हैं वह चल नहीं पाते सरकार के द्वारा दिए गए पैसे से तो दिल्ली पुलिस का या किसी भी पुलिस का गोश्त खाना जायज है नाजायज नहीं है क्योंकि जब कोई भी पुलिस में भर्ती होगा तो उसका पहला जो लक्ष्य होता वह यही होता है कि पैसा कमाना गोश्त खाना बस यही चीज तो दिल्ली पुलिस को भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं मानता मैं इतना मानता हूं लेकिन सौ परसेंट नहीं मानता 100 में से पंचानवे परसेंट ही मानता हूं

लेकिन जो ईपीएफ वाले हैं वह तो 100 में से 100 परसेंट गद्दार हैं टेबल के नीचे से पैसा 21 गोश्त खाएंगे और तब आपका काम होगा गोश्त खाने के लिए पैसा नहीं दोगे तो आपका काम घंटा भी नहीं होगा लटकाए करेंगे आपको

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